जेनरिक दवाइयां और भारत

जेनरिक दवाइयां वे दवाइयां हैं जिनकी पेटेंट सीमा समाप्त हो गई है, यह मूल दवाइयों की प्रतिलिपि को जेनेरिक कहा जाता है जो खुराक,प्रतिरूप, सुरक्षा ,शक्ति,गुणवत्ता, प्रशासन क्रम तथा निष्पादन में उनके समान मौलिकता से निर्मित की जाती हैं, जब उन्हें इसी पंजीकृत ब्रांड नाम के तहत बेचा जाता है तो इसे ब्रांडेड जेनेरिक के रूप में माना जाता है तथा ब्रांड और जेनेरिक  के बीच बस उत्पादित कंपनी का अंतर होता है!
लोक स्वास्थ्य के संदर्भ में जेनरिक दवाइयां क्यों महत्वपूर्ण मुद्दा होना चाहिए:
 1 ब्रांडेड दवाइयां अधिक महंगी है, जेनेरिक दवाइयों को ब्रांडेड के समकक्ष सिद्ध करने के लिए एक पूर्ण नैदानिक परीक्षण नहीं करना पड़ता ,जैब -समकक्षता परीक्षण जेनेरिक दवाइयों हेतु नैदानिक परीक्षणों से अत्यधिक सस्ता है !
2 ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों के बीच मूल्यों  का अंतर इतना अधिक है कि मध्यम वर्ग भी ब्रांडेड दवाइयों को वाहन नहीं कर सकता भारत में आबादी का बड़ा भाग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करता है तथा स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से भी प्रभावित है इसलिए आवश्यक दवाइयों के रूप में जेनरिक दवाइयां गरीबों की पहुंच में सहायक होगा 
3 विश्व स्तर पर  मधुमेह के सबसे अधिक मामले भारत में दर्ज किए जाते हैं और इस रोगों के उपचार हेतु आवश्यक एंटीबायोटिक अत्यधिक महंगी है ब्रांडेड दवाइयों लोगों को गरीबी रेखा से नीचे धकेलती है 
4 परिवार  द्वारा  स्वास्थ्य खर्चे का 70 से 75%तुरंत देय  लागत के रूप में है इसीलिए जेनेरिक दवा ना केवल मरीजों बल्कि सरकारों द्वारा स्वास्थ्य पर किए गए अत्याधिक्  व्यय  की बचत करती है जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली संचालित होती है जेनेरिक दवाएं उत्तम गुणवत्ता कम लागत वाली दवाएं हैं जो ब्रांडेड दवाओं के समान प्रभावशील है 
सामान्यता उपयुक्त ज्ञान की अनुपस्थिति में  क्रय वही दवाएं क्या करते हैं जिन्हें डॉक्टर और औषधीय विक्रेता द्वारा उनके किए तय किए जाते हैं
एंटीबायोटिक दवाइयों के अधिक उपयोग के कारण लोगों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध क्षमता विकसित हो जाती है जिससे दवाओं की पहली पंक्ति अप्रभावी हो जाती है इसीलिए जेनेरिक दवाएं दूसरे विकल्प हो सकता है ,
सरकार द्वारा उठाए गए कदम 
1 जन औषधि केंद्र विशेष रूप से गरीब और वंचितों को अन्य जन "औषधि मेडिकल स्टोर" के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले तुरंत दे लागत को कम करने हेतु गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध कराना 

2 जेनेरिक दवाइयों का प्रिस्क्रिप्शन सरकारी चिकित्सकों को अब भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को ब्रांडेड दवाइयों के स्थान पर अब केवल जेनेरिक दवाएं लिखे यदि चिकित्सा द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा

गरीबी रेखा और स्वास्थ्य के मुद्दों के तहत बड़ी आबादी वाले विकासशील देश होने के कारण समाज के जरूरतमंद वर्गो तक जेनेरिक दवाओं की पहुंच सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य   है जेनेरिक दवाओं तक आसानी से पहुंच प्रदान करने के लिए सरकार को इन सभी प्रयासों का क्रियांवयन करना चाहिए जिससे चिकित्सक और चिकित्सीय प्रणाली में अंतर स्पष्ट हो सके और क्रियान्वयन किया जा सके भारत जेनेरिक दवाइयों को उपभोग भी करें और इसका अत्यधिक उत्पादन करके अफ्रीकी-अमेरिकी देशों में निर्यात भी कर सके यह भारत का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए भारत जेनेरिक मेडिसिन के क्षेत्र में अपने आप को विश्व पटल पर सबसे सर्वोत्तम सिद्ध कर सकता 
बुद्धि नारायण 

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